Friday, 13 September 2013

कहानियां

मैं प्रेमसूख गेहलोत निवासी केराल जिला सिरोही आपके लियें कुछ मनोरंजन  कहानियॉ प्रस्‍तुत करूंगा जिसके माध्‍यम से मेरे छोटे व समकक्ष भाइ बहन पढकर आनन्‍द का अनुभव करेंगे

नाई वाळो थापो

एक दाण री वात है के एक नाई घणो कबद्यो (चालक) हो| हजामतां करावा वाला गराक रे लारे व्हो घणी कबदायाँ (चालाकियाँ) करतो हो| कणी गराक री मूछां डोढ़ी काट देतो, कणी री कलमां (जुल्फा) में काण राख देतो अर कणी रा माथा मा आंगड़ा छोड़ देतो पण वणीज़ वेलाँ माथा पे हलका थापा देयने माफ़ माँग लेतो| नाई आपणी करामात कादां बना रै नीं अर गराक ने दूजी ठोड़ नीं| गराक सब नाई रे सबावऊं हेवा व्हेग्या| वंड़ी पुराणी आदत जांणने वणीने कई केता नीं हा| एक दाण व्हणी नाई एक बारला बाणिया रे हजामत करी| आपणा पाचणा (उस्तरा) ऊं वण्डो माथो घरड़ी ने ताँबा जसो करी दीधो| कई खबर तो टाट रे कारण अन कई खबर पाचणा रे कारण बाणिया रो माथो पलपलाट (बलवा) करवा लागो| आपणो माथो बलतो देख बाणियो बोल्यो के नाई भाई थारो पाचणो अतरो हातरो दीखे, जांणे म्हारै माथा री चामड़ी खेंच लीदी| या वात सुणताई, नाई सकपकायो पय़ण वो हूश्यार भी हो| अतरका में वने बाणिया रो तीखो नाक नजर आइग्यो| वणीज वगत वने एक अकल़ा हुझी| वणी बाणिया रे नाक रे हाथ लागयो अर केयो - "या तो झारा ही डांडी अर यो माथो झारा रो पींदो जांणे| नाक केड़े (बाद में)व्हणी नाई बाणिया री टाट रे हाथ लगायो अर राम जाणे व्हणी नाई ने कई जँची के व्हणी तो बाणिया री टाट में दो थापा लैल दीदा| अर राजी व्हैतो थको बोल्यो, "यो झारो तो घणो टण्णाट करतो बोले| बाणियो धीमा सुभाव रो अर अकल वालो हो| व्हणी बाणियो नाई री अणी कबद (चालाकी) रो तो कई जवाब नीं दीदो पण हजामत री मजूरी दो आना री ठोड़ नाई ने एक कलदार रीपियो (सिक्का) काढ़ ने दे दीदो अर मलकतो थको बोल्यो - "थारी हजामत म्हने घणी हाऊ लागी| हाथ तो थारो फूल ऊं भी हल़को चाले| तो यो रीपियो थारे इनाम रो| नाई राजी वेड़ने रीपियो ले लीदो| जाण्यो के आज तो म्हारी उस्तादी रो घणो आछो फल मिल्यो है| बाणिया जस्या वेंटा म्हारे पां नत हमेस ई आवे| असी उस्तादी तो म्हने दूजा गराकाँ रे लारे भी करणी चावे| अब दूजे दन नाई रे पां एक ठाकर हजामत बणवावा हारू आयो| नाई रे मन में तो पाछला दन री वात बैठी थकी ही| व्हणी बाणिया लारे कीदो जसो बरताव व्हणी ठाकर लारे भी कीदो| इनाम रो भूखो नाई ठाकर रे माथा पे खींचने दो थापा मैल दीदा| अब ठाकर तो ठाकर हा| व्हो बाणियो तो हो नीं| ठाकर न भलो सोच्यो न भूंडो, वणी दाण नाई री ठाकर न भलो सोच्यो न भूण्डो, वणी दाण नाई री गाबड़ी (गर्दन) पकड़ने हेटे नाक्यो| नाई री छाती माथे गोड़ा देयने माथा पे खाड़ा (जूता) ठोक-ठोक व्हणीरा माथा रो मालपुओ कर दीदो| पछे नाई रो इज पाचो लेयने वण्डा नाक- कान गड़ (छिल) दीदा| बोल्यो के - "रीस तो असी आवे के नापटिया रो गलोईज वाढे (काट) न्हाकूं पण नख री हत्या रो पाप कुण ओढ़े? अबे करजे कणीऊं वलेई असी कबद (चालाकी)?" अणी ऊं यो साबित व्हे है के अगर बाणिये खुद नाई री कबद रो बदलो नीं भी लिधो तो व्हणी जो कलदार रीपियो नाई ने दीधो| व्हणी रीपिये नाई रे साथ मे उलटी कबद कराय दीधी| अर बाणिया वाले वेण्डपणे अठे आवतां आपरो गुण बतायो

साधु रीकमाई

एक करसो गाड़ी जोतने दूजे गाम जईस्यो हो| गैला में वणा ने एक माराज व्हणीज गैले जाता थका घक्या| करसो हावल अर भोलो हो| गाड़ी ढाबने बोल्यो - माराज पगे लागूँ ! छत्ती गाड़ी आप पगा क्यूं पधारो? गैलो होरो कटे जसो ई हऊं| आवो गाड़ी में बेठ जावो| थोड़ीक देर म्हने ई ज्ञान- धरम री वाताँ हुणवा मलेला| माराज रे कोड़े एक तंदूरो हो| तो माराज गाड़ी माथे तंदूरो हावल मेली ने पछे खुद पालकती मारने गाड़ी में बेठग्या| चौमासा ( बारिश का मौसम) रे कारण गैला में गडराँ घणी पड़ी गी ही| धचका खाती गाड़ी थोड़ीक आगे गई के गाड़ी रे एक पेड्डा री पूठियां खल - डखल (बिखरना) व्हे ग्यी ! फांदा ढीला पड़ ग्या| करसे बुचकारने बलदां री राड़ी खेंछी| हेटे उतरने देख्यो -- पुठियाँ तो साफ खोली व्हेगी ही| फांदा पाछा ठोकवा हारू हाथाँ में कोई दूजी चीज नजरे नीं आई| थोड़ीक देर वचार करेन व्हणी तो लप करताई माराज रो तंदूरो उठायो| व्हणी जद तंदूरा रे माथा पर एक मोटो तूंबो देख्यो तो व्हणी जाण्यो के फांदा ठोकवा हॉरु हॉउ रॉच है| तो व्हणी करसे तंदूरा ने घुमायने पूरा जोर ऊं एक फांदा माथे वायो| तंदूरो तो मायं ऊं साव थोथो हो| पूठी अर फांदा री भचीड़ उड़ता ई तंदूरा री तो किल्ली-किल्ली (टूकड़े-टूकड़े) बिखरगी| करसे माराज ने ओलिम्बो (डांटना) देता थका केयो -- " वा ओ माराज वा| हंगली ऊमर भर रखड़ता-रखड़ता एक रॉच साचजियो अर व्हो भी साव थोथो! थांणे अणा भगली-भाव में तो म्हनै कई लांबो चौडो तंत (सार) नजरे आयो कोईनी"